पुराणो मे लिखी है.
#शिवपुराण
शिवपुराण मे शिवलिंग स्थापना कि एक कथा है
कथा के अनुसार
दारु नाम के वन मे शिवभक्त ब्राह्मण रहते थे वे एक बार लकडियां चुनने के लिए वन को गये.
उतने मे वहा शिवजी आ गये जोकी नंगे थे और हाथ मे अपना लिंग पकडे हुये थे.
उनको देखकर ऋषींओ कि पत्नीया भयभित,व्याकुल,हैरान हो गयी. कई अलिंगन करने लगी.
उतने मे वहा ऋषी महात्मा आ गये क्रोध मे उन्होंने श्राप दिया कि तुम्हारा लिंग पृथ्वी पर गिर पडे. और वैसा हि हुआ.
वो लिंग जहा भी जाता सब कुछ जलकर भस्म हो जाता.
तब उन ऋषी महात्माओ ने ब्रह्माके कहने पर पार्वती कि आराधना कि.
पार्वतीने योनीरुप धारण करके उस लिंग को अपने अंदर स्थापित कर लिया.
(शिवपुराण, कोटीरुद्रसंहिता 4, अध्याय 12)
क्या कहते हो पंडो क्या अब भी शिवलिंग को प्रतिक या चिन्ह हि कहोगे ?
कथा से स्पष्ट है कि पार्वतीने अपनी योनी मे शंकर के लिंग को स्थापित करके रखा है.
#भविष्य_पुराण
भविष्य पुराण मे भी शिवलिंग पर एक कथा है. कथा के अनुसार
एक बार ब्रह्मा विष्णु और महेश अत्रि ऋषी कि पत्नी अनुसया के पास गये. और उनकी सुंदरता पर मंत्रमुग्ध हो कर उनसे कहने लगे हे मदभरे नेत्रो वाली सुंदरी ! तुम हमे रति प्रदान करो
अन्यथा हम यही तुम्हारे सामने अपने प्राण त्याग देंगे.
पतीव्रता अनुसया ने तिनो को मना कर दिया.
तब शिवजी अपना लिंग हाथ मे पकड लिये और विष्णु उसमे रसवृद्धी करने लगे, तथा ब्रह्मा भी कामपिडीत होकर अनुसया पर टूट पडे.
जब तिनो जबरन अनुसया को मैथुनार्थ पकडने लगे तब उसने तिनो को श्राप दिया तुम तिनो ने मेरा पतिव्रता धर्म भंग करने कि चेष्टा कि है इसलिए महादेव का लिंग विष्णु के चरण और ब्रह्मा का सिर हमेशा उपहास के कारण बनेंगे
(भविष्य पुराण, प्रतिसर्ग पर्व खंड 4,अध्याय 17 श्लोक 67-82,
हिंदी साहित्य प्रकाशन,प्रयाग)
इन दोनो अश्लिल कथाओ से बिलकुल स्पष्ट है कि शिवलिंग शिवजी का प्रतिक या चिन्ह नही बल्की गुप्तांग हि है.
21 वी सदी मे किसी के लिंग कि पुजा करना बहोत हि मुर्खतापुर्ण बात है. लेकिन अपने धर्म कि दुकानदारी चलती रहे इसलिए पंडे शिवलिंग कि सच्चाई लोगों के सामने आने नही देते
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