Tuesday, 16 November 2021

गोबर मल मूत्र।

आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ चरक संहिता में 8 प्रकार के मूत्र का उल्लेख मिलता है । भेड़ का मूत्र , बकरी का मूत्र और गाय का मूत्र । भैंस का मूत्र हाथी का मूत्र ऊंट का मूत्र घोड़े का मूत्र गधे का मूत्र ll ( 79 ( चरक ने सभी के लिए # मूत्र पीने के अलग - अलग फायदे बताए हैं , निम्नलिखित SS में । ) # रुद्राच_मुत्र रुद्र एक वैदिक देवी है अथर्ववेद 6-44-3 के अनुसार एक ही मूत्र अमृत तुल्य औषधि है ( एसएस नहीं है । 3 ) # वेद वेदों में विज्ञान खोजते खोजते मैंने अथर्ववेद पढ़ना शुरू किया मुझे यह विज्ञान पढ़ते समय मिला तेरे # मुत्र द्वार को में खोल देता हूं जैसे झिल का पानी बन्ध को खोल देता है तेरे मूत्र मार्ग को खोल दिया गया है जैसे जल से भरे समुद्र का मार्ग ( अथर्व वेद 1-3-7 , 8 ) शेमकरण दास त्रिवेदी भाषण # पराशर_स्मृत पराशर स्मृति ने # गौमूत्र गोबर का दूध , दही और घी एक साथ पीने की सलाह दी है । क्या ये है उसमे गोमुत्र , गोबर , दुध , दही , घी और कुशा का जल इन सबके मिश्रण को पवित्र एव पापनाशक पंचगव्य कहा गया है . ( पाराशर स्मृति 11/29 ) 
गोमुत्र , गोबर , दुध , दही , घी और कुशा का जल इन सबके मिश्रण को पवित्र एव पापनाशक पंचगव्य कहा गया है . ( पाराशर स्मृति 11/29 ) आगे है या किसी ब्राह्मण ने चांडाल का अन्न खा लिया तो वह # गोमुत्र मे पकाई गयी जव कि लपसी यवागु खाकर शुद्ध होता है . ( पाराशर स्मृति 6/32 ) # बृहदारण्यक_उपनिषद इसके अनुसार अश्वमेध यज्ञ में आहुति देने वाला घोड़ा प्राकृतिक वस्तुओं की तुलना में रूपक रूपक है । इस हिसाब से तो घोड़े के मूत्र की तरह बारिश हो रही है । उसका शरीर हिलाना # मेघका गर्जन है . वह जो # मुत्र त्याग करता है वही वर्षा है ( बृहदारण्यकोपनिषद , शंकर - भाष्य , गीताप्रेस पृष्ठ 40 ) इसी से हम समझते हैं कि ब्राह्मण धर्म पूरी तरह से नीरस धर्म है


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पर्वत उड़ना।