कुंभ और बाबा साहब डॉ. आंबेडकर (1954): “कुंभ के मेले में नंगे साधुओं के पैरों तले कुचलकर हज़ारों नागरिक मर गए। धर्म के प्रति इतना अंधविश्वास और पागलपन विश्व के किसी देश में हमें दिखाई नहीं देगा...मैं अगर मंत्री होता और अगर अधिकार होते तो मैं उन साधुओं को सेना भेजकर भगा देता.”
“ज़रूरत पड़ने पर गोलियाँ भी बरसाता। पहाड़ों पर रहने वाले साधुओं को अगर लोगों के बीच आना हो, तो उन्हें कपड़े पहन कर ढंग से आना चाहिए। लेकिन हमारे शासकों ने ऐसे समय में क्या किया? लोगों के अंधविश्वास को धार्मिक लोकप्रियता के लिए भुनाया।”
बाबा साहब ने यह वक्तव्य 14 नवम्बर, 1954 को हैदराबाद में दिया था। इससे पहले प्रयाग कुंभ में मची भगदड़ में हज़ार के आसपास लोग मरे थे। - बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर संपूर्ण वांगमय, खंड -40, भाग- 3, पेज -359, प्रकाशक-भारत सरकार (मराठी में भी प्रकाशित)
चूँकि चुनाव सिर पर हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर दूसरे दिन बाबा साहब का नाम लेकर वोट माँग रहे हैं तो उन्हें देखना और पढ़ना चाहिए कि बाबा साहब के, राजकाज के बारे में विचार क्या था। फ़ोटो को फूल चढ़ाना बेहद सस्ता काम है।
Dilip C Mandal सर की वाल से
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