Thursday, 18 March 2021

पति सेवा।

करवाचौथ का व्रत रखने से पहले महिलाएँ इसे जरूर पढ़ लें!

नास्ति स्त्रीणां पृथग्यज्ञो न व्रतं नाप्युपोषणम्।
पतिं    शुश्रूषते   येन   तेन    स्वर्गे   महीयते।।

अर्थात् :- स्त्रियों के लिए पृथक कोई यज्ञ नहीं है, न व्रत है, न उपवास, केवल पति की सेवा से ही उसे स्वर्ग मिलता और महिमा होती है।

(मनुस्मृति, अध्याय - 5, श्लोक - 155)

इस संबंध में एक अन्य श्लोक भी है -

पत्यौ जीवति या तु स्त्री उपवासं व्रतं चरेत्।
आयुष्यं  बाधते  भर्तुर्नरकं  चैव   गच्छति।।

अर्थात् :- पति के जीते जो स्त्री भूखे रहने वाला उपवास करती है, वह पति की आयु में बाधा पहुँचाती है और नरक को जाती है।

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पर्वत उड़ना।