करवाचौथ का व्रत रखने से पहले महिलाएँ इसे जरूर पढ़ लें!
नास्ति स्त्रीणां पृथग्यज्ञो न व्रतं नाप्युपोषणम्।
पतिं शुश्रूषते येन तेन स्वर्गे महीयते।।
अर्थात् :- स्त्रियों के लिए पृथक कोई यज्ञ नहीं है, न व्रत है, न उपवास, केवल पति की सेवा से ही उसे स्वर्ग मिलता और महिमा होती है।
(मनुस्मृति, अध्याय - 5, श्लोक - 155)
इस संबंध में एक अन्य श्लोक भी है -
पत्यौ जीवति या तु स्त्री उपवासं व्रतं चरेत्।
आयुष्यं बाधते भर्तुर्नरकं चैव गच्छति।।
अर्थात् :- पति के जीते जो स्त्री भूखे रहने वाला उपवास करती है, वह पति की आयु में बाधा पहुँचाती है और नरक को जाती है।
No comments:
Post a Comment