Friday, 19 March 2021

द्वारपाल

 मेरा सवाल है, सवाल खड़ा करने का अभिप्राय सिर्फ इतना है कि इसमें ऐसा क्यों लिखा हुआ है, क्या क्षत्रिय शूद्र थे, जिन्हें किस वज़ह से सवर्ण वर्ण मे लाया गया, क्या क्षत्रियों ने कोई भारी विरोध किया था......????


श्रीमदभागवत पुराण प्रथम स्कन्द - 18 व चतुर्थ स्कन्द - 22 मे इस बात का उल्लेख किया गया है।

द्वारपाल का मतलब चौकीदार या गेटकीपर

जिसे ये अधिकार नही था कि वो ब्राम्हण(मालिक) स्वामी
के घर के अंदर प्रवेश कर सकें, ब्राम्हण के बतर्न मे खाना खा सकें।
प्रथम स्कन्द - 18
मे लिख रहे हैं (नरपति)
(जूठन खाने वाले )
कौओं की तरह की

संड मुसंड होकर कितना अन्याय करने लगे हैं।

ब्राम्हणों के दास होकर भी ये दरवाज़े पर पहरा देने वाले
(कुत्ते) के समान अपने स्वामी का ही तिरस्कार करते हैं।(33)

चतुर्थ स्कन्द - 22

ब्राम्हणों ने क्षत्रियों को अपना द्वारपाल बनाया है।
उन्हें द्वार पर रहकर रक्षा करनी चाहिए,
घर में घुसकर स्वामी के बर्तनों मे खाने का उसे अधिकारनही है।(34)
मेरा सवाल सिर्फ़ सभी क्षत्रियों से है।
क्या ये सही लिखा है, और अगर ऐसा लिखा है तो तब क्षत्रिय किस वर्ण मे था.........???
स्वर्ण या शूद्र



No comments:

Post a Comment

पर्वत उड़ना।