राक्षस के अर्थ - संबंधी जो भी प्राचीन साहित्य के सबूत हैं , वे गवाही देते हैं कि राक्षस का मूल अर्थ रक्षा करना ही था ।
राक्षस को पालि और प्राकृत में " रक्खस " कहा जाता है । " रक्खस " का अर्थ है - रक्ख अर्थात रखवाली , रक्षण या पालन करने वाला ।
वेदों का " रक्षस् " भी पालि और प्राकृत से भिन्न नहीं है । वेदों में " रक्षस् " के दो अर्थ प्रमुख हैं - 1 रक्षा करने वाला 2 अन्न का छिलका । छिलका अन्न का रक्षक है और रक्षस् देश या समाज के रक्षक थे ।
भाषावैज्ञानिकों ने बताया है कि अंग्रेजी का husks ( छिलका , भूसा ) इसी रक्षस् का प्रतिरुप है ।
ऐसा जान पड़ता है कि आक्रमणकारियों ने देश के रक्षक को ही राक्षस बताया है जैसे अंग्रेजों ने स्वतंत्रता सेनानियों को विद्रोही बताया है ।
गुरतेज सिंह गिल ने रामायण से यह प्रमाण दिया है कि जो रक्षा करता है, वह राक्षस है।
प्रो राजेन्द्र प्रसाद
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