*** होली का सच ***
होली
के त्योहार से संबंधित जितने भी तथ्य मनुवादियों ने दिए हैं मैंने उन
तथ्यों को धर्मग्रंथों में खोजने की कोशिश की, शायद कहीं लिखा मिल जाए, कि
होली इसलिए मनाते हैं ?
वामन पुराण, पद्म पुराण, विष्णु पुराण, स्कंद पुराण, लिंग पुराण खंगाल डाले परंतु कहीं भी कडियाँ एकदूसरे से जुड़ती हुई नहीं मिली।
पहली कथा
किवदंतियों
के अनुसार होली का त्योहार होलिका दहन के उपलक्ष में मनाया जाता है और
होलिका को विष्णु भक्त प्रह्लाद की बुआ कहा जाता है जो प्रह्लाद को मारने
के लिए अग्नि में प्रह्लाद को लेकर बैठी परंतु स्वयं ही भस्म हो गई।
ब्राह्मणों
ने इस कथा का प्रचार बहुत किया, लोगों को मूर्ख बनाने के लिए इसे पुराणों
से भी जोड़ दिया, परंतु पुराणों में लिखना भूल गए, इस कथा के लिए ब्राह्मण
"विष्णु पुराण" और "पद्म पुराण" का संदर्भ देते हैं जिसमें भक्त प्रह्लाद
कथा का उल्लेख है, परंतु मुझे नीचे
दिया गया उल्लेख मिला।
ब्रह्मा
के पुत्र दक्ष के 60 कन्यायें पैदा होती हैं इनमें से दक्ष ११ का विवाह
कश्यप से करते हैं दक्षपुत्री दिती और कश्यप से दो जुड़वां पुत्रों का जन्म
होता है जिन्हें सभी लोग हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष के नाम से जानते हैं,
उपरोक्त दोनों पुराणों में कश्यप और दिती से उत्पन्न किसी भी कन्या का
उल्लेख नहीं है।
हिरण्यकश्यप के चार पुत्र पैदा होते हैं उनके नाम
प्रह्लाद, अनुह्लाद, संघह्लाद और ह्लाद था जब हिरण्यकश्यपके कोई बहन ही
नहीं थी तो प्रह्लाद को मारने के लिए "होलिका" कहाँ से पैदा हुई ?
दूसरी कथा
राजा पृथु और धुंधी राक्षसी से संबंधित है मुझे राजा पृथु तो मिले परंतु धुंधी का कहीं कोई अता पता नहीं मिला।
होली का त्योहार कब और कैसे शुरू हुआ इसका पुख्ता प्रमाण अभी तक मुझे धर्मग्रंथों से प्राप्त नहीं हुआ है ।
अब
सवाल ये उठता है कि जिस महिला होलिका को इन पाखंडियों ने जलाया वो कौन थी
? जिसकी मृत्यु पर इतना बड़ा त्योहार मनाया जाता है। मेरी खोज जारी रहेगी
जब तक मुझे इतिहास से पुख्ता प्रमाण नहीं मिलता।

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