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पुराणों में नियोग
भागवत के ९ स्कन्ध में लिखा है कि राजा भरत के ,जिससे पांड्वो का वंश चला ,कोई पुत्र नही था उसने भारद्वाज नाम का पुत्र गोद लिया इस भाएद्वाज की उत्पति इस तरह लिखी है कि उतथ्य की स्त्री ममता से बृहस्पति ने अपने भाई के जीते जी सम्भोग कर भारद्वाज उत्त्पन्न किया |
पुराणों में नियोग
भागवत के ९ स्कन्ध में लिखा है कि राजा भरत के ,जिससे पांड्वो का वंश चला ,कोई पुत्र नही था उसने भारद्वाज नाम का पुत्र गोद लिया इस भाएद्वाज की उत्पति इस तरह लिखी है कि उतथ्य की स्त्री ममता से बृहस्पति ने अपने भाई के जीते जी सम्भोग कर भारद्वाज उत्त्पन्न किया |
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नियोग विधि
* हे स्त्री जीवित पति को लक्षय करके उठ खड़ी हो (यहा पर देवर,पंडित,ऋषि मुनि, इत्यदि की बात हो रही है।) मरे हुए पति के पास क्यों पड़ी है, आ हाथ ग्रहण करने वाले नियुक्त इस पति के साथ संतान जनने को लक्षय में रखकर संबंध कर।(नियोग कर) ( ऋग्वेद 10:18:8)
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