आदिदेव, पुरातन देव श्री हरी ने पहले यमराज का प्रभार संभाला हुआ था तब कोई प्राणी मरता ही नहीं था। बस प्राणियों की वृद्धि ही हो रही थी। पृथ्वी पर भार बहुत बड़ गया। पृथ्वी दब कर पाताल में कई सौ योजन ( एक योजन में 13 से 16 किलोमीटर होता है ) चली गई। पृथ्वी विष्णु के पास जा कर रोई तब विष्णु ने पृथ्वी का ढांढस बंधाया। बोला तेरा भार हल्का करूंगा। किया या नहीं यह तो महाभारत में नहीं लिखा परंतु तभी वराह रूप में अवतार लिया। उस वराह का एक ही दांत बाहर की तरफ था, उसी दांत से एक ही बार ने धरती को 100 योजन ऊपर उठा दिया। लिखा तो ऐसा भी है कि पृथ्वी पानी में डूब गई थी। ( डूबने से प्राणी क्यों नहीं मरे यह नहीं बताया) आज का विज्ञान तो बताता है कि ब्रह्मांड में पदार्थ की कमी या बढ़ोतरी नहीं होती सिर्फ पदार्थ रूप बदली करते है। जैसे लकड़ी का जलना, लकड़ी ख़तम हुई तो राख, ऊष्मा और गैस उतने ही परिमाण में बन गई। अगर प्राणी बढ़ गए तो वह पदार्थ कम हुए जिनसे प्राणी बना है।
पृथ्वी पर भार बढ़ने की बात को महाभारत में फिर दूसरे प्रसंग में दूसरे तरीके से बयान किया गया है।
जब महाभारत युद्ध में अभिमन्यु की मृत्यु हुई तब नारद जी पांडवो का ढांढस बंधाने के लिए कथा बखान करते है।
आदि समय में प्राणियों के मरने का कोई प्रावधान नहीं था। पृथ्वी पर भार बढ़ गया। तब ब्रह्मा ने प्राणियों के सहार का विचार किया और कोई उपाय ना मिलने पर क्रोध आ गया। क्रोध की अग्नि से दुनिया जलने लगी। तब रुद्र देव स्थाणु भागे भागे दुनिया के भले के ब्रह्मा के पास आए। उस समय ब्रह्मा ने एक नारी की उत्पति की और उसको मृत्यु के नाम से बुलाया और आदेश दिया कि, मूर्ख या पंडित ( कोई अच्छे या बुरे का फ़र्क नहीं ) सभी लोगों का सहार करना है। तब वह मृत्यु नामक औरत रोने लगी लेकिन ब्रह्मा ने उसके आसूं लोगों के भले के लिए अपने हाथो में लेे लिए। महाभारत कथा ने आगे है ब्रह्मा ने उसी मृत्यु नामक स्त्री को बोला कि तेरे आंसुओं को जो मैंने अपने हाथ में लिया था वह प्राणियों के अपने ही शरीर में बीमारियां बन कर प्राणियों का विनाश करेंगी। आंसूओं को लोगों के भले के लिए और वहीं आंसू लोगों की बीमारियां बना कर प्राणियों के विनाश का कारण, बात समझ नहीं आई ।
इस तरह मृत्यु ब्रह्मा द्वारा उत्पन्न स्त्री का नाम है। इसी तरह स्वाहा भी स्त्री का नाम है जो अग्नि देव की पत्नी है, इन्हीं दोनों के पुत्र का नाम स्कन्द है जिसके नाम पर स्कन्द पुराण भी है। स्वाहा की कथा दूसरे पोस्ट में ।
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