Thursday, 18 March 2021

पत्नी हरण।

मेरे इस पोस्ट का उद्देश्य किसी पर जातिगत कटाक्ष करना नही है, पर पुराणों मे जो लिखा है, मै उसे बताना भी अपना कर्तव्य समझता हूँ।
आमतौर पर सब लोग पुराण पढ़ते नही हैं, अतः ऐसी कई बातें जनमानस को पता ही नही होती, जो उनके लिये पुराणों मे लिखी गयी है।

ऐसी ही एक कहानी विष्णुपुराण, पाँचवां अंश, अध्याय-298 मे लिखी है-
......यह उस समय की कथा है जब ऋषियों के श्राप से यदुवंश का नाश हो चुका था, और श्रीकृष्ण की समस्त पत्नियों को अर्जुन द्वारिका से हस्तिनापुर लेकर जा रहे थे। जब अर्जुन कृष्ण की पत्नियों को लेकर हस्तिनापुर जा रहे थे, तभी रास्ते मे लुटेरों ने अर्जुन को हराकर कृष्ण की पत्नियों का हरण कर लिया था।

वैसे उक्त कथा तो लगभग सभी लोग जानते ही होंगे, पर बहुत कम लोग जानते होंगे कि श्रीकृष्ण की सुन्दर पत्नियों का हरण करने वाले वे लुटेरे कौन थे?

.....विष्णुपुराण के अनुसार वे लुटेरे आभीर (वर्तमान समय के अहीर) थे।

बहुत से यादव सरनेम वाले मित्र कहते हैं कि यादव और अहीर एक ही हैं, जबकि मै इसका कई बार खण्डन कर चुका हूँ... विष्णुपुराण मे भी वही लिखा है। विष्णुपुराण के अनुसार यादव चन्द्रवंशीय क्षत्रिय थे, जिनका विनाश दुर्वासा और गांधारी के श्राप की वजह से द्वापर मे ही हो गया था। पर अहीर वे लोग हैं, जिन्होने कृष्ण की पत्नियों का हरण किया, और बाद मे उन्ही से संतानोत्पत्ति की।

विष्णुपुराण मे अहीरों को दस्यु और नीच लिखा गया है। विष्णुपुराण मे लिखा है कि नीच अहीरों ने अर्जुन को हराकर कृष्ण की पत्नियों का हरण कर लिया।

अब सोचनीय बात यह है कि श्रीकृष्ण के वंशजों को विष्णुपुराण मे नीच तो नही लिखा जायेगा।

वैसे इस पोस्ट को अधिक समझने के लिये पोस्ट के साथ संलिग्न की गयी तस्वीरें पढ़े, और खुद का दिमाग लगायें।

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पर्वत उड़ना।