1. भगवान कार्तिकेय और भगवान स्कन्द ( जिसके नाम पर स्कन्द पुराण है ) दोनों एक ही है। लेकिन महाभारत में एक जगह स्कन्द को अग्नि का बेटा बताया गया है ( क्योंकि अग्नि के खुद के वीर्य से पैदा हुआ ), जबकि महाभारत में ही दूसरी जगह स्कन्द का जन्म शिव के वीर्य से दिखाया है। तीसरी जगह है बाल्मीकि रामायण जिसमें विश्वामित्र 16 साल के राम को स्कन्द उर्फ कार्तिकेय के जनम के बारे बताता है । चोथी जगह है स्कन्द पुराण। बाल्मीकि रामायण और महाभारत की एक कहानी कुछ मिलती जुलती है। बाल्मीकि रामायण में ज्यादा विस्तार से बताया है उसके अनुसार शिव अपनी पत्नी पार्वती के साथ 36000 साल ( 100 दिव्य वर्ष - एक दिव्य वर्ष मनुष्य के 360 वर्ष के बराबर है। ) क्रीड़ा करता रहा लेकिन बच्चा पैदा नहीं कर सका। ऋषियों ने ही यह काम क्रीड़ा बन्द करने को बोला जिसको शिव ने स्वीकार किया लेकिन पूछा की अगर मेरा वीर्य खुद से स्खलित हो जाए तो कोन संभालेगा। बोला गया कि पृथ्वी संभालेगी लेकिन पृथ्वी भी ना संभाल पाई, फिर अग्नि और वायु भी असफल, फिर गंगा भी असफल। गंगा का जब भ्रूण को जब पर्वत की चोटी पर स्थापित किया । जबकि महाभारत में कहानी यहीं से शुरू होती है कि शिव का वीर्य अग्नि में गिर गया। फ़र्क यह है बाल्मीकि रामायण में ब्रह्मा ने अग्नि और वायु को नियुक्त किया पृथ्वी पर गिरे हुए वीर्य को संभालने में जबकि महाभारत में वीर्य सीधे सीधे अग्नि में ही गिरा। आगे की कहानी बराबर समान ही है। लेकिन महाभारत में आगे स्कन्द को अग्नि का बेटा ही बताया है । तब वह वीर्य गंगा के गर्भ में स्थापित किया गया लेकिन वह भी असफल रही तब भ्रूण को हिमालय की चोटी पर डाला गया। जहां सप्त ऋषियोंके सात पत्नियों में से 6 ने उस बालक को अपना दूध पिलाया था और बालक के 6 सिर (मुंह ) भी ही गए थे। यही कार्तिकेय है यही स्कन्द है जिसके नाम पर स्कन्द पुराण भी है। गंगा के गर्भ से भ्रूण निकलने पर जो मल था वहीं धरती पर भिन्न भिन्न धातुएं बन गई। पार्वती ने धरती और देवताओं को श्राप दिया कि धरती अनेक राजाओं की पत्नी बनेगी अर्थात धरती पर कभी एक राजा नहीं होगा अनेक राजा होंगे और देवता कभी बालक पैदा नहीं कर सकेंगे। श्राप इस लिए कि वह खुद से अपने गर्भ से बालक पैदा करना चाहती थी लेकिन इन्होंने विघ्न डाला। महाभारत में जहां कार्तिकेय को शिव के वीर्य से उत्पन्न बताया वहीं कार्तिकेय उर्फ स्कन्द को अग्नि का बेटा भी बताया गया है।
2. जहां इस स्कन्द उर्फ कार्तिकेय को अग्नि का बेटा बताया उसमे शिव का कोई नाम ही नहीं आता। अग्नि का सप्त ऋषियों की पत्नियों को देख कर मन खराब हो गया लेकिन कुछ कर नहीं पाया। तब इसी असफलता को लेे कर वह आत्महत्या के इरादे से जंगल में चला गया। दक्ष की बेटी स्वाहा जो अग्नि को पहले से चाहती थी ने इस स्थिति का फायदा उठा कर सप्त ऋषियों की सात पत्नियों में से एक का रूप बना कर अग्नि के पास पहुंच गई और बताया हम सातों आप पर मरती है और खुद उससे संभोग किया फिर बोली कि लोग पहचान लेंगे तो बेइज्जती होगी इसलिए मैं गरूडी पक्षी बन कर जाती हूं। और इस तरह वह अग्नि के वीर्य को लेकर हिमालय पर्वत की चोटी पर डाल दिया। फिर दोबारा दूसरी ऋषि पत्नी का रूप धर कर गई। फिर वीर्य वहीं डाल दिया। कुल 6 बार 6 ऋषि पत्नियों का रूप धर कर गई। सातवीं पत्नी पति सेवा में ही लीन रही उसका रूप नहीं धरा जा सका। इस लिए 6 सिर मुंह वाला स्कन्द पैदा हुआ। इसी स्कन्द ने अपनी माता स्वाहा को अग्नि के साथ सदा के लिए जोड़ दिया। उसके प्रयत्न से ही जब जब अग्नि को आहुति दी जाती है, स्वाहा बोल कर ही दी जाती है।
3. उपरोक्त दोनों कहानियां महाभारत जो महाभारत में है उनमें जहां स्कन्द उर्फ कार्तिकेय को शिव के वीर्य से उत्पन्न दिखाया वहीं उसको अग्निपुत्र भी बोला गया। और जहां अग्नि के वीर्य से उत्पन्न दिखाया और शिव का नाम ही नहीं आता वहां स्कन्द को शिव का पुत्र बताया यह बोल कर की अग्नि शिव का ही स्वरूप है।
4. तीसरी कहानी खुद स्कन्द पुराण में है वह काफी हद तक महाभारत की एक कहानी से मिलती है लेकिन फ़र्क इतना है कि शिव के वीर्य स्खलित होने से पहले ही शिव के काम क्रीड़ा और वीर्य से लोग त्रस्त हो गए। अग्नि शिव के घर जाकर पार्वती से भिक्षा मांगी तब पार्वती ने शिव का वीर्य ही अग्नि के हाथ में दे दिया जिसको अग्नि ने पी लिया। अग्नि वीर्य के तेज से त्रस्त हो गया। नारद ने सलाह दी जो भी प्रातकाल दिन होने से पहले सर्दी से कांपता हुआ आग सेकने के लिए आए उस के गर्भ में यह वीर्य डाल दे। सप्तऋषियों की पत्नियां जो खुद भी तारागण ही थी रात की सर्दी से त्रस्त हो कर आग सेकने का मन बनाया। जबकि एक ऋषि पत्नी अरुंधति ने बाकी 6 को रोका भी पर वे रुकी नहीं। अग्नि ने 6 कृतिकाओं में वह वीर्य स्थापित कर दिया। वह सभी 6 गर्भवती हो गई। फिर उन्होंने वीर्य या गर्भ पर्वत की चोटी पर डाल दिया। उस गर्भ या वीर्य के प्रताप से पूरा पर्वत सुवर्णमय हो गया। फिर वह गर्भ या वीर्य गंगा नदी में छोड़ दिया। बहता हुआ सरकंडों के समूह में चला गया । यही स्कन्द उर्फ कार्तिकेय का जन्म हुआ।
5. उपरोक्त 3 नंबर पैरा वाली कहानी जहां महाभारत में है वहीं एक अजीब ना समझ आने वाली कहानी भी साथ जुड़ी हुई है। इन्द्र ने एक लड़की को एक देत्य से बचाया। लड़की ने बताया वह ऐसा पति चाहती है जिसमें ये ये गुण हों। इन्द्र इस के समाधान के लिए लड़की को ब्रह्मा के पास लेे गया। इन्द्र को देवों की सेना के लिए सेनापति की तलाश थी और लड़की को वर की। लड़की प्रजापति की बेटी थी और इन्द्र की पत्नी दक्ष की बेटी थी। इन्द्र कहता है कि तुम मेरी मौसी की लड़की हुई। ( दक्ष और प्रजापति तो एक ही हैं और अगर एक ही हैं तो वह इन्द्र की मौसेरी बहन नहीं साली हुई ). ब्रह्मा ने कहां की इस का पति और तेरी देवों की सेना का सेनापति एक ही होगा। वह भी स्कन्द ही। लड़की का नाम भी देवसेना ही बताया गया है। देवसेना का पति और देवों की सेना का पति एक ही। अब ना समझ आने वाली बात यह है जिस लड़की स्वाहा ने अग्नि से 6 बार संभोग किया और उसका वीर्य हाथ में लेकर पर्वत कि चोटी पर स्थापित किया वह भी दक्ष प्रजापति की बेटी थी। और उसी वीर्य से पैदा होने वाले स्कन्द को पति बनाने वाली देवसेना भी दक्ष प्रजापति की बेटी थी। यानी दोनों बहनें भी हुई और सास बहू भी हुई। दूसरी ना समझ आने वाली बात यह है कि जब ब्रह्मा ने पहले ही बता दिया था कि वही स्कन्द इस लड़की का पिता भी होगा और सेनापति भी। फिर भी इन्द्र को स्कन्द पर आक्रमण करते दिखाया गया है वह भी स्कन्द की हत्या के इरादे से। असफल रहने पर स्कन्द की अधीनता स्वीकार भी की और सेनापति भी बनाया और अपनी मौसेरी बहन ( या साली ) देवसेना का विवाह भी स्कन्द के साथ किया।
6. जब स्कन्द एक ही है तो कहानियों में फ़र्क क्यों। एक ही महाभारत में दो अलग अलग कहानियां क्यों ? क्या इस को सच मान लिया जाए कि धरती पर सभी धातुओं का निर्माण शिव के वीर्य से निर्मित गंगा के गर्भ में भ्रूण के मल से ही हुआ। जबकि महाभारत में एक और जगह धातुओं के निर्माण की अलग कहानी भी है। वहां भी धरती पर धातु रक्त, हड्डियों से बताया गया है ।
7. शिव का वीर्य इतना शक्तिशाली है तो शिव के लिंग की पूजा करनी तो बनती ही है।
8. रामायण, महाभारत और स्कन्द पुराण, तीनों ही गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित है और उनके संबंधित पन्ने नीचे डाल दिए गए है।
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