Thursday, 25 March 2021

भागवत पुराण

 

हिन्दू धर्म ग्रंथो में कहानियां इस प्रकार बनाई गई है कि चित भी मेरी, पट भी मेरी। धार्मिक अंधश्रद्धा वाले लोगों को ब्राह्मण बता देते है कि धर्म ग्रंथो में स्त्री को बहुत सम्मान दिया गया है। और अंधश्रद्धा वाले लोग वाह वाह कर के मान लेते है लेकिन स्त्री के प्रति ना तो इन अंधश्रद्धा वाले लोग सम्मान रखते है ना ही पूरा समाज। स्त्री का दर्जा समाज में कम कैसे हो गया यह ब्राह्मण पुजारी नहीं बताते। स्त्री देवी है, लक्ष्मी है कहते हैं लेकिन पुरुष देवता है यह कभी नहीं कहते। फिर भी गर्भवती स्त्री को पुत्री संतान होने का आशीर्वाद देने का कोई सोच भी नहीं सकता। महाभारत में कई जगह लिखा है कि पुत्री का जनम शुभ नहीं है। यह मातृकुल, पितरिकुल और जिस कुल में शादी होती है, तीनों कुलो को संशय में डालती है।
कुंवारी लड़की पिता के अधीन होती है उसको किसी लड़के से बातचीत करना स्वीकार्य नहीं है। पिता की मर्जी ही सर्वोपरी है। लेकिन हिन्दू धर्म में 8 तरह के विवाह भी स्वीकार्य है जिनमे कुछ तो आजकल के हिसाब से अपराध कि श्रेणी में रखा गया है। गंधर्व विवाह मतलब लव मैरिज। दुष्यंत ने शकुन्तला से गंधर्व विवाह इस शर्त पर किया की उत्पन्न होने वाला बालक राजा बनेगा। यह लव मैरिज कैसे हुई, यह तो सौदे बाजी हुई । राक्षस विवाह यानी रोती हुए लड़की के परिजन भाई माता पिता वगेरह और रोती हुई कन्या, बलपूर्वक शादी। पैशाचिक विवाह मतलब माता पिता भाई बहन की जानकारी के बगैर धोखा देकर कन्या का सोते हुए अपहरण करना। 2 तरह की शादी और हैं जिसमें एक है कन्या के पिता द्वारा वर से कुछ साधारण मूल्य लेकर और दूसरा है वर से अधिक मूल्य लेकर कन्या को सौंपना। लेकिन ब्राह्मण लोग कथित हिन्दू विद्वान गंधर्व विवाह का बखान कर के ही रुक जाते है। समाज में तो लव मैरिज भी स्वीकार्य नहीं है। ऐसा क्यों?
ब्रह्मवैवर्त पुराण में कथा आती है कि तुलसी ( बाद में पोधे होने के शाप के कारण पृथ्वी पर अाई ऐसा लिखा है। ) वह स्त्री के बारे में पुरुष ( जिससे बाद में शादी कर ली) को क्या बोलती है:-
कुलीन पुरुष को अकेली लड़की से बात नहीं करनी चाहिए। नीच कुल में जन्म लेने वाला ही पर नारी के बारे में सोचता है उसको पाने की लालसा रखता है।
औरत की वाणी मीठी होती है लेकिन उसके अंदर जहर होता है, जहर भरे घड़े के समान है। हमेशा अभिमान में रहती है। बोली से ऐसे जान पढ़ता है जैसे अमृत भरी हुई हो। संसार रूपी जेल में डालने के लिए सांकल का काम करती है। बाहर से बहुत सुंदर दिखती है लेकिन अंदर से कुत्सित ( घिनौली, निंदित, अधम) होती है। स्त्री के शरीर के नाना प्रकार के मल मूत्र और गंदी वस्तुएं होती है। इसका शरीर रक्तरंजित और दोष्युक्त है और कभी शुद्ध नहीं होता। मोक्ष की इच्छा करने वालों के लिए यह जहर का काम करती है । यानी औरत नरक का द्वार है।
लेकिन हमारे ऋषि मुनि, देवता वगेरह जो इन्द्रियों को वश में करने का ज्ञान देते ही रहते है, हमेशा औरत को देखकर अपना वीर्य गिराते रहते थे।
मेरा भारत महान।
 


 
 
 
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पर्वत उड़ना।