पुराणों मे एक बड़े प्रतापी राजा हुये थे, जिन्हे राजा सुदास कहा जाता है। राजा सुदास का वर्णन ऋग्वेद मे भी आया है, और अम्बेडकर ने भी अपनी किताब "शूद्र कौन थे" मे इनका जिक्र किया है। अम्बेडकर ने यहाँ तक लिखा है कि सुदास और पैजवन शूद्र राजा थे और सुदास ने तो ऋग्वेद के कुछ मंत्रों की रचना भी की थी।
सुदास राजा के पुत्र का नाम था सौदास! राजा सौदास की कथा विष्णुपुराण के खण्ड-4, अध्याय-4 मे लिखी है।
एक बार वशिष्ठ जी ने किसी कारण से राजा सौदास को बारह वर्ष के लिये नरभक्षी राक्षस हो जाने का श्राप दे दिया। उनका श्राप तीन दिन मे फलीभूत हुआ और राजा सौदास तीसरे दिन राक्षस हो गये।
राक्षस होने के बाद वे वन मे चले गये और वहाँ विचरण करने वाले मानवों को मारकर खाने लगे। एक दिन उसी वन मे एक ऋषि अपनी पत्नि के साथ सम्भोग कर रहे थे, तभी राक्षसरूपी राजा वही आ धमके। राजा को देखते ही ऋषि और ऋषि-पत्नि अपना कार्यक्रम आधे-अधूरे मे ही छोड़कर जान बचाने के लिये भागे। राजा ने भी उनका पीछा किया और तेजी से झपटकर ऋषि को पकड़ लिया।
अपने पति को राक्षस के हाथों पकड़े जाने पर ऋषि-पत्नि बहुत दुःखी हुई और वह राक्षस बने राजा के पास आकर उनसे अपने पति के छोड़ देने की प्रार्थना करने लगी।
ऋषि पत्नि ने राजा सौदास से कहा कि- हे राजन! आप मूलतः राक्षस नही है, बल्कि आप तो इक्ष्वाकु-वंशी धर्म-धुरंधर राजा हैं। हे महाराज... आप तो स्त्री-संयोग के सुख से भलीभाँति परिचित ही है! राजन मै अभी तक अतृप्त हूँ, अतः मेरे पति को छोड़ दो।
ऋषि-पत्नि ने राक्षसरूपी राजा सौदास से बहुत विनय किया... लेकिन राजा ने एक न मानी और ऋषि को मारकर खा लिया। फिर क्रोध मे आकर ऋषि-पत्नि ने राजा को श्राप दिया कि जिस प्रकार मै अतृप्त थी और तुमने मेरे पति को मार दिया, उसी प्रकार जब तुम भी कामवासना मे लिप्त होगे, तभी तुम्हारी भी मृत्यु हो जायेगी।
बारह वर्ष बाद जब राजा पुनः मनुष्य बनकर अपने महल वापस आये तो उन्होने अपनी पत्नि से सारी बात बतायी। उनकी पत्नि मदयंती बहुत कामाशक्त थी, पर राजा ने उसे अपनी विवशता बतायी कि मै सम्भोग नही कर सकता! राजा की दूसरी समस्या यह थी कि वे उस समय निःसन्तान थे, और उनके बाद उनके राज्य का उत्तराधिकारी नही था।
अन्त मे राजा ने विवश होकर अपनी पत्नि मदयंती को वशिष्ठ से गर्भाधान करने की अनुमति दी। विष्णुपुराण मे यह बहुत स्पष्ट लिखा है कि वशिष्ठ ने मदयंती से गर्भाधान किया, जिससे राजा का वंश आगे बढ़ा।
विष्णुपुराण के अनुसार इसी कुल मे आगे चलकर रघु, अज, दशरथ और स्वयं श्रीराम भी पैदा हुये।
इस पोस्ट को लिखने का मेरा केवल इतना ही आशय था कि जो लोग गला फाड़कर चिल्लाते हैं कि ऋषि-मुनि चमत्कारों से बच्चे पैदा कर देते थे, वे बता सकतें हैं कि वशिष्ठ जैसे दिव्यऋषि ने गर्भाधान (ऋतुकाल मे सम्भोग) क्यों किया?
अच्छा है कि इस पुराण ने "गर्भाधान" शब्द लिख दिया! यदि इसने भी जरा छुपाकर यह लिखा होता कि ऋषि की कृपा से मदयंती गर्भवती हुई तो ये यहाँ भी कहते कि कोई चमत्कार किया होगा।
तो मेरे भइया लोग! यह बात जान लो कि सेक्स के बिना संतान नही पैदा होती थी, चाहे पाण्डव हो या जीसस, सब सेक्स से ही पैदा हुये हैं। आगे शायद विज्ञान बिना सम्भोग के संतान पैदा करना सम्भव कर दे, पर हजारों साल पहले ऐसी कोई विधि नही थी।
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