ब्राह्मण अकेली औरत को देख कर औरत के घर में आ कर ऐसा बोलता हैै :-
"उत्तम सोने के रंग वाली, रेशमी पीले कपड़े धारण करने वाली, तुम्हारे मुंह, आंखे, हाथ और पैर कमलों के समान हैं। तुम भूती या स्वेच्छा पूर्वक विहार करने वाली कामदेव की पत्नी रती तो नहीं हो। तुम्हारे दांत बराबर है। तुम्हारा अग्र भाग कुंद की कलियों के समान शोभा पाते हैं। वे सब चिकने और सफेद हैं। तुम्हारी आंखें बड़ी बड़ी और काली हैं। कोएं लाल है। पुतलियां काली है । कटी ( मनुष्य के शरीर का वह मध्य भाग जो पेट और चूतड़ों के बीच में होता है।)का अग्र भाग विशाल और मांसल है। दोनों जांघें हाथी की सूंड के समान शोभा पा रही हैं।"
"तुम्हारे दोनों स्तन पुष्ट, गोल, परस्पर सटे हुए, मोटे, उठे हुए, कमनिय, ताड़फल के समान आकार वाले है।"
"सुन्दर मुस्कान, रुचिर दंतावली, मनोहर आंखोवाली मनोहर रमणी, तुम अपने रूप सौंदर्य से मेरे मन को हर ले रही हो।"
"तुम्हारी कमर इतनी पतली है कि हाथ में आ जाए। बाल चिकने और दिल को हर ले जाने वाले है। तुम्हारे स्तन सटे हुए हैं।"
ऐसी बातें सुन कर अकेली औरत क्या करेगी ? नहीं, नहीं। ऐसा नहीं हैं, जैसा आप सोच रहें हैं। आप सोचोगे आज कल के जमाने के हिसाब से।लेकिन ये कहानी है त्रेता युग की। उस समय के ब्राह्मण, ऋषि, मुनि ऐसे ही हुआ करते थे। ( ऋषि नहीं महा ऋषि विभांडक का वीर्य अप्सरा को देख कर नहाते समय नदी में गिरा, प्यासी हिरनी ने जल के साथ वीर्य को पी लिया तो उसके पेट से श्रृंगी ऋषि पैदा हुआ जो श्री राम का जीजा था। )
इस कहानी में अकेली औरत ब्राह्मण की ऐसी बातें सुन कर खुश हो गई। आदर सहित बिठाया। पांव धोने और पीने को पानी दिया और खाना खाने को बोला। फिर पूछने पर अपने और अपने पति के पूरे खानदान और घर की अंदर कि बातें बता दी। जैसे पिता का नाम, कितने साल शादी को हुए, सवसुर, सास इत्यादि सब के बारे में।
इस कहानी में औरत सीता माता हैं। और ब्राह्मण वेषधारी असल में रावण है।
सीता माता ने बताया कि 12साल दसरथ के महल में पूरे ठाठ से रही। 13 वे साल मेरे पति राम का राज्य अभिषेक होना था लेकिन काम पीड़ित मेरे सवसुर दसरथ ने केकई की बात मान कर मेरे पति को बनवास दे दिया। मैं उस समय 18 की थी और मेरे पति 25 के। इसका मतलब निकलता है कि राम सीता के विवाह के समय राम कि उमर 12 साल की तथा सीता की 6 साल की थी। जब सीता को रावण ने हरण किया तब बनवास के 10/11 साल बीत चुके थे। यानी शादी के 22/ 23 साल तक कोई बच्चा नहीं हुआ। 6 साल की उम्र में शादी हुई तो रजस्वला होने की उमर अगर 16 साल भी मान लिया जाए तो 12/13 साल तक बच्चा नहीं हुआ, यह तो मानना ही पड़ेगा।
चतुर्वेदी द्वारका प्रसाद शर्मा द्वारा अनुवादित 1927 में छपी और गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित बाल्मीकि रामायण के संबंधित पन्ने पोस्ट कर दिए है।
कमेंट ज्ञानवर्धन के आमंत्रित हैं।
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