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---वेद आर्यों की बर्बरता के लिखित दस्तावेज--
आर्यों
के वेद और कुछ नहीं बल्कि आर्यों की यहां के मूलनिवासी अनार्यों पर
दमनात्मक बर्बरता की काली हकीकत है,आर्यों की इस बर्बरता को कालांतर में
कोई जान न सके इसलिए उन्होंने किसी अन्य को वेदों के पढ़नें पर रोक लगाई हुई
थी-एक नजर-
वज्रधारी इंद्र ,-दास ,दुर्गों को नष्ट करने के लिये जाते
हैं,-हे इंद्र दस्युओं पर वज्र डालो,और आर्यों के बल और कीर्ति में वृद्धि
करो.(यह ऋषिजनों द्वारा इंद्र सेनापति को न केवल प्रेरणा थी,बल्कि
दिशा-निर्देशन भी था,शत्रुओं का नाश करके ही शक्ति में वृद्धि की जा सकती
है,तथा सत्ता हथियाई जा सकती है).
-तुमने अपने अनुयायियों द्वारा विरोधियों को जीता, तुम्हारे मंत्र रूप स्तुतियों नें दस्युओं पर विजय प्राप्त कराई.
-आर्यो
को सिंधुघाटी निवाशियों की अपार धन संपदा के लोभ नें भी बार बार आक्रमण
करने के लिए आकर्षित किया,यज्ञ करने के लिए धन प्राप्त करने को ऋषि तथा
मुनि,क्षत्रियों को दस्यु तथा दासों पर आक्रमण कर धन लूटने को बार बार
प्रेरित करते थे.
-हे इंद्र तुम वृष्टि करने वाले हो,जब तुमने शुष्ट के नगरों को नष्ट किया,तब तुमने उसके धन को भी लूटा.
-हे
अग्ने-(ऊंचे चबूतरों पर बसे शहरों व किले) पर उत्पन्न धन को जीतकर तुमने
अपनें उपासकों को दिया,तुम वीर के समान होकर शत्रुओं के हिंसक बनों,जो
शत्रु युद्ध करने के लिए आये उसका सामना करो.
ऋग्वेद में आर्य-अनार्यों के युद्ध
पृष्ठ-130.














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