Thursday, 25 March 2021

गोल्डेन रूल

 

जिस नैतिक नियम को आजकल 'गोल्डेन रूल' या 'एथिक आफ रेसिप्रोसिटी' कहते हैं उसे भारत में प्राचीन काल से मान्यता है। सनातन धर्म में इसे 'धर्मसर्वस्वम्" (=धर्म का सब कुछ) कहा गया है
श्रूयतां धर्मसर्वस्वं श्रुत्वा चाप्यवधार्यताम्।
आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्।। (पद्मपुराण, शृष्टि 19/357-358)
अर्थ:- धर्म का सर्वस्व क्या है, सुनो ! और सुनकर इसका अनुगमन करो। जो आचरण स्वयं के प्रतिकूल हो, वैसा आचरण दूसरों के साथ नहीं करना चाहिये।
!! जय श्री राम !!

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ऋग्वेद १०/३५/१३ में लिखा है कि है मनुष्यों जुआ मत खेलो | लेकिन पौराणिक शिव ने यहा वेद विरुद्ध कार्य किया और उसका परिणाम भी भुगता 
पद्म पुराण उत्तर खंड दीपावली महात्म्य वर्णनम में आया है कि - शिव और पार्वती ने जुआ खेला और पार्वती ने शिव को जीत लिया ,क्यूंकि पार्वती ने लक्ष्मी की पूजा की थी | पार्वती ने शिव को नंगा कर के घर से निकाल दिया

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पर्वत उड़ना।