********
*******
*****
****
****
*****
हिन्दु
धर्मशास्त्रों मे हनुमान को बहुत बुद्धिमान बताया गया है, "बुद्धिमतां
वरिष्ठं" और "विधावान गुनि अतिचातुर" जैसे शब्दो से सुशोभित किया गया हैं!
अब मै आपको हनुमान की बुद्धिमानी का एक उदाहरण देता हूँ..... यह बात तब की है जब हनुमान सीताजी को खोजते हुये लंका के अशोक वाटिका पहुँचे, हनुमानजी ने सीताजी से कहा कि मै श्रीराम का दूत हूँ...... पर सीता नही मान रही थी, सीताजी बोली कि आप बताओ रामजी देखने मे कैसे है तो मै मान जाऊँ.....
फिर हनुमान जी ने रामजी का वर्णन करना शुरू किया.... हनुमानजी बोले कि रामजी के बाल घुँघराले और आँखे लम्बी है, और रंग सांवला है!
यह सब बताते-बताते हनुमानजी सीता से बोले कि श्रीराम के केशों का अग्रभाग, अण्डकोष और घुटने ये तीनो बराबर है..... स्तनो (छाती) का अग्रभाग धंसा है, पुष्ट (जांघे) सुडौल है और शिश्न (लिंग) चिकना है!
(गीताप्रेस, बाल्मीकि रामायण/सुन्दरकाण्ड सर्ग-35 श्लोक-17/18 पृष्ठ संख्या-693)
हनुमान ने बड़ी गम्भीर बात कह दी, सवाल यह है कि हनुमानजी ने रामजी की जांघे,अण्डकोष और लिंग कब और कैसे देखा...... अगर कभी अन्दर-बाहर देख भी लिया तो सीताजी को बताने कि क्या जरूरत थी!
क्या यहीं हनुमान जी की बुद्धामानी है कि जिसे माँ कहते हैं उसी के सामने अण्डकोष और लिंग की बात कर रहें है, और सीताजी भी यह सुनकर क्या सोंच रही होगी!
अब मै आपको हनुमान की बुद्धिमानी का एक उदाहरण देता हूँ..... यह बात तब की है जब हनुमान सीताजी को खोजते हुये लंका के अशोक वाटिका पहुँचे, हनुमानजी ने सीताजी से कहा कि मै श्रीराम का दूत हूँ...... पर सीता नही मान रही थी, सीताजी बोली कि आप बताओ रामजी देखने मे कैसे है तो मै मान जाऊँ.....
फिर हनुमान जी ने रामजी का वर्णन करना शुरू किया.... हनुमानजी बोले कि रामजी के बाल घुँघराले और आँखे लम्बी है, और रंग सांवला है!
यह सब बताते-बताते हनुमानजी सीता से बोले कि श्रीराम के केशों का अग्रभाग, अण्डकोष और घुटने ये तीनो बराबर है..... स्तनो (छाती) का अग्रभाग धंसा है, पुष्ट (जांघे) सुडौल है और शिश्न (लिंग) चिकना है!
(गीताप्रेस, बाल्मीकि रामायण/सुन्दरकाण्ड सर्ग-35 श्लोक-17/18 पृष्ठ संख्या-693)
हनुमान ने बड़ी गम्भीर बात कह दी, सवाल यह है कि हनुमानजी ने रामजी की जांघे,अण्डकोष और लिंग कब और कैसे देखा...... अगर कभी अन्दर-बाहर देख भी लिया तो सीताजी को बताने कि क्या जरूरत थी!
क्या यहीं हनुमान जी की बुद्धामानी है कि जिसे माँ कहते हैं उसी के सामने अण्डकोष और लिंग की बात कर रहें है, और सीताजी भी यह सुनकर क्या सोंच रही होगी!
■■■
ऋग्वेद १०/३५/१३ में लिखा है कि है मनुष्यों जुआ मत खेलो | लेकिन पौराणिक शिव ने यहा वेद विरुद्ध कार्य किया और उसका परिणाम भी भुगता
पद्म पुराण उत्तर खंड दीपावली महात्म्य वर्णनम में आया है कि - शिव और पार्वती ने जुआ खेला और पार्वती ने शिव को जीत लिया ,क्यूंकि पार्वती ने लक्ष्मी की पूजा की थी | पार्वती ने शिव को नंगा कर के घर से निकाल दिया


























No comments:
Post a Comment