Friday, 19 March 2021

गुदा इंद्रि और हस्थ्मेथुन

 







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क्या स्वामी दयानंद हस्तमैथुन करते थे.

सत्यार्थ प्रकाश मे स्वामी दयानंद माता-पिता बालक को कौनसी उत्तम शिक्षा करे इस विषय मे कहते है.

#उपस्थेन्द्रिय से स्पर्श और मर्दन से विर्य कि क्षीणता नपुंसकता होती है.
और हस्त मे दुर्गंध भी होता है इससे उसका स्पर्श न करे.

(सत्यार्थ प्रकाश,पृष्ठ 34)

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स्वामी दयानंद को कैसे पता चला कि विर्य कि गंध कैसी होती है.
अब या तो उन्होंने किसी दुसरे का विर्य हाथ पर लेकर देखा होगा या फिर खुद हस्तमैथुन करके देखा होगा.

शायद उन्हें ऐसा करने कि आदत हि पड गयी थी.
और उनकी अम्मा ने उन्हें एक बार ऐसा करते हुए देखकर जोरदार डांट लगायी होगी.

इसलिए उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश मे आर्य माताओं को हस्तमैथुन के विषय मे शिक्षा देने के लिए कहा है. 



****** रूद्र एक वैदिक देवी है अथर्ववेद 6-44-3 के अनुसार एक ही मूत्र अमृत के समान औषधि है
***** कैथरीन मेयो, एक अमेरिकी यात्री जो 1924-25 में भारत आई थी, ने अपनी भारत माता की किताब में लिखा था कि ब्राम्हण धर्मी लोग जहाँ चाहें शौचालय करते हैं, शौचालय बनाने के बाद भी पखान (शौचालय) को चुपके से छोड़ देते हैं, अर्थात बिना पानी दिए निकल जाते हैं

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पर्वत उड़ना।