Thursday, 18 March 2021

बकरा, अंडकोष। गोबर।

सुश्रुत संहिता में बकरे के आंड से 100 पुरूष की शक्ति प्राप्ति
आयुर्वेद की मशहर पुस्‍तक सुश्रुत संहिता में जानवरों तथा इन्‍सान के वीर्य का विधान भी मिलता है, 
दूध से निकाले घी में पिप्‍पली और लवण के साथ बकरे के अंडकोशों को अंड सिद्ध करके जो पुरूष खाता है वह एक सौ स्त्रियों से रमण कर सकता है

पिप्‍प्‍लीलवणोपेते बसण्‍डे क्षीर्रस‍पिषि
साधिते भक्ष्‍येमद्यस्‍तु स गच्‍छेत् प्रमदाशतम
---- सुश्रुत संहिता, चिकित्‍सा स्‍थानम 26/20

अर्थात दूध से निकाले घी में पिप्‍पली और लवण के साथ बकरे के अंडकोशों को अंड सिद्ध करके जो पुरूष खाता है वो एक सौ त्रियों से रमण कर सकता है

पिप्‍प्‍लीलवणोपेते बस्‍ताण्‍डे घृतसाधिते
शिशुमारस्‍य वा खदेत्ते तु वाजीकरे भृशम
कुलारकूर्मनक्राणाण्‍डान्‍येवं तु भक्षयेतृ
महिषर्षभबस्‍तानां पिबेच्‍दुकाणि वा नर-
---- सुश्रुत संहिता, चिकित्‍सा स्‍थानम 26/25-27
 अर्थात घी में तले हुए बकरे के या शिश्‍ुमार (उदबिलाव) नामक जंतु के अंडकोशों को पिप्‍पली और सैंधा नमक के साथ खाएं, ये अतिशय वा‍जीकर (सेक्‍स शक्ति बढाने वाले) हैं, केकडा, नक्र(घडिया) के अंडकोशों को भी इसी प्रका खाएं अथ्‍वा, भैंसे, बैल या बकरे के वीर्य को पीएं 

हाथी,चीते और सांप की खाल से तव्‍चा के रोग दूर किये जा सकते हैं, तो सांप की खाल से फुल बहरी, अस्थियों की राख से शर्करा नष्‍ट किया जा सकता है, जिन्‍दा मछली से अस्‍थमा का इलाज शायद यह किताब पढ कर ही किया जा रहा है


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नारद उचाव- 

पण्डितास्तु कलत्रेठ रमते महिपाइव।
पुत्रस्योत्पादने दक्षा अदक्षा मुक्ति साधने।।
(महात्म प्रकरणं भागवत अध्याय 1 श्लोक 75)

अर्थात्‌- कलियुग के पौराणिक पडिँत औरतोँ से भैँसे के समान रमण करते हैँ।
वे केवल लड़के पैदा करने मेँ ही कुशल होते हैँ। धर्म कर्म व मोक्ष साधनोँ के बारे
मेँ खाक भी नहीँ जानते।

नारद बाबा ने अकाट्‌य सत्य कहा है।
******** कुछ सालों से विभिन्न भाषाओं में कॉपी पेस्ट वायरल हो रहा है जिसमें ऋग्वेद ने प्रकाश की गति का उल्लेख किया है यही कारण है कि रिचा को दिया जाता है 👇 सहस्त्र द्वे की योजनाओं को मेरा नमन । ऋग्वेद 1-50-4 को संदर्भ दिया जाता है (कुछ लोग पोल खुलने के डर से संदर्भ नहीं देते । )) क्योंकि सच तो यह है कि 1-50-4 में ऐसी कोई रिचा नहीं है । इस पूर्ण धागे में सूर्य भगवान की स्तुति करें 7 घोड़े के रथ पर घूमते सूर्य देव (देखें ऋचा 8,9) विज्ञान नहीं उल्टा अंधविश्वास है वेदों में विज्ञान खोजने वाले आर्य समाजी को सामाजिक भाषा में इतनी समृद्धता नहीं है । अब बात करते है नकली ऋचा की जिसे कॉपी पेस्ट दिया जाता है यह झूठ सबसे पहले 1998 में सुभाष काक नामक प्रोफेसर ने अपने शोध पत्र में किया था । आधुनिक विज्ञान ने सबको प्रकाश की गति का पता लगाया है उस आधार पर ये लोग नए मंत्र के श्लोक बना रहे हैं और दिखा रहे हैं कि हमारी पुस्तकों में यह सब पहले से ही हो रहा है शिक्षित लोगों के बीच धर्म का विपणन करने के लिए ऋग्वेद में कोई ऋचा नहीं जो साईना भाष्य, दयानंद भाष्य, श्री राम शर्मा आचार्य भाष्य में नीचे चेक किया जा सके


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गाय के गोबर और मूत्र का आजकल बहुत मजाक बनता है। जो इनको पवित्र खाद्य या पैय मानते है, वह भी अब शर्म करने लगें हैं। फिर अंधभक्तों के पास एक ही तरह का जवाब होता है कि कुछ मुस्लिम भी ऊंट का मूत्र पीते हैं, उनका मजाक क्यों नहीं उड़ाते ?

गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित महाभारत  अनुशासन पर्व 82 वा अध्याय में जो बताया गया है, उसके अनुसार गाय के दूध, दही और घी में भी वह बात नहीं है जो गाय के गोबर और मूत्र में है। संबंधित पन्ने नीचे पोस्ट कर दिए गए हैं।

लक्ष्मी जी एक बार गायों के झुंड में घुस गई। गायों के परिचय पूछने पर लक्ष्मी ने परिचय दिया और फिर कहा कि मुझे अपने शरीर में रहने की जगह दीजिए। पहले तो गायों ने मना किया। लक्ष्मी ने कहा कि मुझे तुम्हारे अंगों में कोई भी अंग घटिया नहीं जान पढ़ता जहां मै रह सकती इसलिए तुम ही बताओ कि मै कहां रहूं।

गायों ने फिर अपना गोबर और मूत्र बताया और लक्ष्मी जी मान गई। तब से लक्ष्मी  गाय के गोबर और मूत्र में निवास कर रही है।

अब समझ में आ जाना चाहिए कि बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने जो बोला था कि एक गाय का जो गोबर होता है वह कोहिनूर हीरे के बराबर होता है, वह निराधार नहीं सच्चाई थी। लक्ष्मी जी खुद निवास करती है गाय के गोबर और मूत्र में।

लेकिन फिर बीफ के निर्यात में भारत पहले नंबर पर क्यों ? मोदी जी ने बोला था कि मेरे जैन मित्र बीफ का कारोबार करतें हैं।

सभित पात्रा  ( गोबर पात्रा )का वीडियो लिंक :- https://youtu.be/Vm4GBCPLM5Q

मोदी के जैन मित्र बीफ कारोबारी हैं, मोदी का खुद का स्वीकारना , लिंक :- 
https://youtu.be/vdmb9ZdYl0E


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आयुर्वेद के अनुसार यौन शक्ति बढ़ाने के उपाय

 सुश्रुत संहिता आयुर्वेद का एक प्राचीन प्रसिद्ध ग्रंथ है, इसका धार्मिक लोगों द्वारा व्यापक रूप से उल्लेख किया गया है लेकिन मुझे आयुर्वेद के ये ग्रंथ आधुनिक समय में अप्रचलित लगते हैं

 सुश्रुत संहिता के अनुसार,
  अगर बकरी के अंडकोष दही को घी के साथ खाते हैं तो व्यक्ति 100 महिलाओं के साथ सेक्स कर सकता है
 (सुश्रुत संहिता, चिकित्सा स्थानम 26/20)

 सुश्रुत संहिता, संस्कृत ग्रंथमाला, चौखम्बा वाराणसी।

 अब आयुर्वेद के समर्थक बताएं कि यह बात कितनी सच है

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सांघी का गोबर समर्थन उनकी पुस्तक का मूल है।

 पाराशर स्मृति ने गाय के दूध, दही और घी में गोमूत्र मिलाकर पीने की सलाह दी है।
 इसमें है

 गोमूत्र, गोबर, दूध, दही, घी और कुश के मिश्रण को पवित्र और एंटीसेप्टिक पंचगव्य कहा गया है।
 (पराशर-स्मृति 11/29)

 अगला है

 यदि कोई ब्राह्मण चांडाल का भोजन खाता है, तो वह गोमूत्र में पकाया जाता है, जो लपसी यावगु को खाने से शुद्ध होता है।
 (पराशर स्मृति 6/32)


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पर्वत उड़ना।