नवरात्रि लगभग खत्म हो रही है, उसके बाद नौ-दिनों तक आस्था की केन्द्र बनी दुर्गा की मूर्तियों को नजदीकी नदियों/नहरों मे फेंक दिया जायेगा!
खैर... यह सतत प्रकृया है, पर दुर्गा को लेकर अभी भी सवाल वही है कि दुर्गा आखिर कौन थी?
पुराणों के अध्ययन से पता चलता है कि महिषासुर के पास न तो कोई चमात्कारी वरदान था और न ही कोई विलक्षण शक्ति, फिर आखिर उसे विष्णु या शिव ने क्यों नही मार दिया?
एक महिला दुर्गा ही क्यों उसे मारती है?
मार्कण्डेयपुराण शाक्त-सम्प्रदाय का मुख्य पुराण है! इसी पुराण से दुर्गा-सप्तशती लिखी गयी है! पिछले एक सप्ताह से मै दुर्गा के बारे मे खोजते-खोजते इसी पुराण तक पहुँचा! इस पुराण के देवी माहत्म्य द्वितीयोऽध्याय मे दुर्गा की उत्पत्ति की कथा है! वैसे तो यह कथा भी पूर्णतः काल्पनिक ही है, फिर भी मै आप लोगों को बता देता हूँ।
कथानुसार महिषासुर ने तमाम देवताओं को हराकर स्वर्ग से बाहर खदेड़ दिया! तब सारे देवता ब्रह्मा, विष्णु और शिव के पास आये और अपना विधवा-विलाप करने लगे। फिर सभी देवताओं ने महिषासुर को मारने के लिये अपने-अपने तेज से एक देवी को प्रकट किया। शंकर के तेज से देवी का मुख, विष्णु के तेज से भुजाऐं, यम के तेज से बाल, चन्द्र के तेज से दोनो स्तन, इन्द्र के तेज से कमर, वरुण के तेज से जंघा, पृथ्वी के तेज से पुष्ठ, ब्रह्मा के तेज से चरण, सूर्य के तेज से अंगुलियाँ, कुबेर के तेज से नाक, प्रजापति के तेज से दांत, अग्नि के तेज से आँखें, और वायु के तेज से उस देवी के कान बने! यही देवी पुराणों मे 'दुर्गा' के नाम से विख्यात हुई! फिर सारे देवताओं ने उस देवी को अपने-अपने अस्त्र देकर महिषासुर से लड़ने के लिये भेजा।
अब यहाँ सवाल यह बनता है कि इतने सारे देवता थे! स्वयं सर्व-शक्तिमान शिव और विष्णु भी थे, फिर आखिर ये सब महिषासुर से लड़ने क्यों नही गये?
क्यों सबने एक महिला को भेजा?
दूसरी बात जिस तरीके से दुर्गा की उत्पत्ति बतायी जा रही है यह तो पूर्णतः अवैज्ञानिक और अप्राकृतिक है।
खैर.. अब आगे बढ़ते हैं, और देखते हैं कि दुर्गा महिषासुर से कैसे लड़ती है?
इसी पुराण के तीसरे अध्याय मे दुर्गा और महिषासुर के युद्ध का विस्तार से वर्णन है! जब दुर्गा महिषासुर से युद्ध कर रही थी तो क्रोध मे आकर वह बार-बार मधु (मदिरा) पी रही थी, और उसको मदिरा का इतना अधिक प्रभाव हो गया था कि उनकी आँखें लाल हो गयी थी तथा बोलते समय उसकी वाणी भी लड़खड़ा रही थी।
अब ये समझ मे नही आ रहा है कि मदिरा पीकर कौन सा युद्ध हो रहा था?
भला युद्धक्षेत्र मे भी कोई मदिरा पीता है?
वैसे दुर्गा यही नही रुकी, इसी अध्याय के श्लोक-38 मे दुर्गा बोलती हैं-
"गर्ज गर्ज क्षणं मूढ मधु यावत्पिबाम्यहम् ।
मया त्वयि हतेऽत्रैव गर्जिष्यन्त्याशु देवताः।।"
अर्थात- हे असुर! जब तक मै मधु पीती हूँ, तब तक तू खूब गरज ले! मेरे हाथों यही तेरी मृत्यु हो जाने पर देवता भी शीघ्र गर्जना करेंगे।
यह श्लोक अपने-आप मे लम्बी कहानी समेटे हुआ है!
कई लोग कहते हैं कि देवी ने युद्ध मे मदिरा नही मधु पिया था! तो मै कहूँगा कि मधु पीने से किसकी जबान लड़खड़ाती है?
मधु पीने से आँखें क्यों लाल होगी?
ये सम्पूर्ण कहानी कुछ और ही है, लेखकों ने बड़ी चतुराई से सच को दबा दिया है!
या तो ये कहानी पूर्ण काल्पनिक है, क्योंकि दुर्गा और महिषासुर का जन्म प्राकृतिक नही है! या तो इस कहानी को कुछ दूसरा ही रंग दे दिया गया है!
अभी भी बड़ा सवाल यही है कि यदि महिषासुर आतातायी था तो उसे देवताओं ने क्यों नही मारा, क्यों सर्वशक्तिमान देवों के रहते हुये भी एक महिला को शस्त्र देकर उससे लड़ने भेजा गया?
सोचो, सोचो.....
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